मुख्य विषयवस्तु में जाएं |
सफलता की कहानियों पर वापस जाएं

राज्य : तमिलनाडु

जिला : कांचीपुरम

ब्लॉक: उथिरमेरुर

गाँव : रावथानल्लूर

स्वयं सहायता समूह : आरोग्य अन्नाई स्वयं सहायता समूह

उत्पादक समूह : दुग्ध उत्पादक समूह

आजीविका गतिविधियाँ: पशुपालन (डेयरी और बकरी पालन) और आटा चक्की

लखपति दीदी की यात्रा:

एस्तेर विन्नारासी मूल रूप से 'आरोग्य अन्नाई स्वयं सहायता समूह' की सदस्य थीं। समूह के शुरुआती दिनों में, वे गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रही थीं और उनके लिए समूह से लिए गए पुराने ऋणों (कर्ज) का ब्याज चुका पाना भी मुश्किल हो रहा था।

उनके जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब उनके गाँव में उत्पादक समूह (पी.जी.) योजना की शुरुआत हुई। एस्तेर "पाल उत्पादन विवसाया कुझु" (दुग्ध उत्पादक किसान समूह) में शामिल हो गईं, जिससे उनके लिए वित्तीय सहायता और प्रगति के नए रास्ते खुल गए। समूह (पी.जी.) के माध्यम से, उन्होंने सफलतापूर्वक 30,000 रुपए का ऋण प्राप्त किया और तीन बकरियाँ खरीदीं। सावधानीपूर्वक पालन-पोषण के साथ, उनका बकरी पालन व्यवसाय बढ़ा और उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। इस कमाई को फिर से निवेश करते हुए, उन्होंने 2 गायें खरीदीं, जिससे डेयरी के माध्यम से उनकी दैनिक आय में काफी वृद्धि हुई।

उत्पादक समूह (पी.जी.) की सामूहिक शक्ति और भी नए अवसर लेकर आई। समूह को 50,000 रुपए का मशीनरी अनुदान (ग्रांट) प्राप्त हुआ, जिसका सदस्यों ने सूझ-बूझ से उपयोग करते हुए एक आटा चक्की खरीदी। एस्तेर, समूह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर, अब इस चक्की का उपयोग सूखे आटे के उत्पाद बनाने के लिए करती हैं, जिन्हें वे स्थानीय बाजारों में बेचते हैं।

आजीविका के इन विविध साधनों ने उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है। एस्तेर अब अपने सभी कर्ज़ आसानी से चुका पा रही हैं, और उन्होंने अपने जानवरों के लिए एक उचित शेड भी बनवा लिया है। आज वह खुशी-खुशी जीवन बिता रही हैं; उन्होंने आर्थिक तंगी से निकलकर पूर्ण स्थिरता और आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।

और देखें